धनपुरी की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता: वरिष्ठ समाजसेवी श्री छोटेलाल सरावगी (खुद्दी भैया) से मिली प्रेरणा पर जनसेवक की खुली चिट्ठी

🙏 आज की मेरी यह पोस्ट परम सम्माननीय, पिता तुल्य, वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व विधायक श्री छोटेलाल सरावगी जी (खुद्दी भैया) की प्रेरणादायक पोस्ट देखकर लिखने का साहस जुटा पाई है।
बाबूजी को कोटि-कोटि नमन एवं धन्यवाद।

“कबीरा खड़ा बाजार में, लै लकुटी हाथ
जो घर फूंके आपना, चले हमारे साथ”

अगर खिलाफ हैं, होने दो, जान थोड़ी है
ये सब धुआं है, कोई आसमान थोड़ी है…

जो आज साहिबे मसनद हैं, कल नहीं होंगे,
किराएदार हैं, ज़ाती मकान थोड़ी है।

— राहत इंदौरी

यह पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि सत्ता और पद स्थायी नहीं होते — जो आज कुर्सी पर हैं, वे कल नहीं रहेंगे। सत्ता जनता की सेवा के लिए है, न कि निजी लाभ के लिए।


बाबूजी की निस्वार्थ सेवा को नमन

बाबूजी ने धनपुरी-बुढार जैसे छोटे नगर को बड़ी-बड़ी सौगातें दीं। आज भी वे पूरी निष्ठा और समर्पण से जनता की सेवा में सक्रिय हैं।
मेरे पिता जी, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, उन्होंने भी बाबूजी के साथ वर्षों तक समाज और आदर्शों के लिए कार्य किया। लेकिन आज के समय की सच्चाई कड़वी है — अब अधिकांश लोग “समाज सेवा नहीं, अपनी सेवा” के लिए चुनाव मैदान में उतरते हैं।


नगर पालिका धनपुरी में अव्यवस्थाओं का अंबार

शहडोल मध्यप्रदेश की कोयला नगर की नगर पालिका धनपुरी की वर्तमान स्थिति चिंताजनक है।
एसईसीएल से मिलने वाली करोड़ों रुपये की रॉयल्टी कुछ प्रभावशाली लोगों के निजी हितों में खर्च हो रही है।
कई लोग सांसद या विधायक प्रतिनिधि बनकर अधिकारियों पर दबाव बनाते हैं और मनमाने टेंडर अपने करीबियों को दिलवाकर कमीशनखोरी में लिप्त हैं।

नगर पालिका में अध्यक्ष से लेकर पार्षद तक –
जिनके पास पहले कुछ नहीं था, वे आज ठेकेदारी में मोटी कमाई कर रहे हैं।
मकान टैक्स, जलकर टैक्स, भवन निर्माण परमिशन और छूट के नाम पर जनता का पैसा खुलेआम लूटा जा रहा है।


वार्ड क्रमांक 16 की दुर्दशा

वार्ड क्रमांक 16, कच्छी मोहल्ला की सड़क जो 30 वर्ष पहले बनी थी, आज मरम्मत की दरकार में है।
न सफाई होती है, न कचरा उठाया जाता है, न नालियों में दवाई का छिड़काव।
कई बार आवेदन और मौखिक निवेदन करने के बावजूद डामरीकरण का कार्य अब तक नहीं हुआ।

हिन्दवली किराना दुकान से असलम मामा के तिराहे तक सड़क जर्जर हो चुकी है।
नगर पालिका के किसी अधिकारी या पार्षद ने इस दिशा में रुचि नहीं दिखाई।


सफाई व्यवस्था ध्वस्त

नगर पालिका क्षेत्र की अधिकांश नालियाँ कवर कर दी गई हैं, जिससे अब यह समझना मुश्किल है कि कीटनाशक दवाइयाँ या फिनायल कहां डाली जा रही हैं।
वार्ड में न तो सफाई कर्मचारी उपलब्ध हैं, न हाथ ठेले।
कई बार कहने पर भी पार्षद पति की यही बात होती है – “नगर पालिका से हाथ ठेला मांगते-मांगते थक गया।”


कचरा डस्टबिन और बच्चों के झूले पर सवाल

नगर पालिका ने लाखों रुपये खर्च कर स्टील के डस्टबिन खरीदे — पर वे लगे कहाँ हैं?
कृपया इसकी जानकारी जनता को दी जाए।

इसी प्रकार, रीजनल अस्पताल (एसईसीएल बीटीसी परिसर) के बाहर बच्चों के खेलने हेतु झूले लगाए गए हैं,
पर वहाँ ना सुरक्षा व्यवस्था है, ना बैरिकेडिंग, जबकि वह स्थान मुख्य सड़क (अमरकंटक मार्ग) से सटा हुआ है, जहाँ हर समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।


स्टाफ डैम बना – एक बारिश में धराशायी

करोड़ों की लागत से बनाए गए स्टाफ डैम की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल है।
इंजीनियरों ने “अजर-अमर” बताकर काम शुरू कराया था, परंतु एक बरसात भी नहीं झेल सका।
अब जनता जानना चाहती है —

स्थल चयन किसने किया?

निर्माण की अनुमति किसने दी?

गुणवत्ता जांच के लिए क्या कोई समिति थी?


अंत में एक सवाल और एक संकल्प

धनपुरी की जनता यह जानना चाहती है कि आखिर नगर पालिका में करोड़ों के विकास कार्यों का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है — जनता को या कुछ चुनिंदा लोगों को?

यदि मेरी बातों से किसी को ठेस पहुँची हो तो मैं क्षमा चाहता हूँ 🙏
मेरा उद्देश्य किसी की आलोचना नहीं, बल्कि धनपुरी के भविष्य के लिए सच्चाई को उजागर करना है।

जज़्बे शौक़-ए-शहादत को क्या कीजिए,
अब तो हमने भी हाथों में सर ले लिया,
क़ातिलों से आखिर कब तक डरें,
क़ातिलों के मोहल्ले में घर ले लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *