गोलू–आदेश गैंग सिंहपुर के जंगलों में चला रहे अवैध जुआ फड़, पुलिस की मिलीभगत के आरोप तेज

गोलू–आदेश गैंग सिंहपुर के जंगलों में चला रहे अवैध जुआ फड़, पुलिस की मिलीभगत के आरोप तेज

कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति… थाना प्रभारी पर लग रहे गंभीर आरोप

इंट्रो

कुछ ही दिन पहले घुनघुटी के जंगलों में टेंट लगाकर संचालित हो रहे अवैध जुआ फड़ का वीडियो वायरल हुआ था, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। उस प्रकरण में आज तक न तो कार्रवाई हुई और न ही यह स्पष्ट हो पाया कि उसमें शामिल कौन-कौन लोग थे। अभी उस घटना को पखवाड़ा भी नहीं बीता कि अब एक और चौकाने वाली खबर सामने आ रही है—गोलू और आदेश फिर से सिंहपुर के जंगलों में विशाल जुआ फड़ चला रहे हैं।

इस बार चर्चा इसलिए और गर्म है क्योंकि दोनों को कांग्रेसी नेताओं का खुला संरक्षण मिलने की बात सामने आ रही है। शहडोल ही नहीं, बल्कि मनेंद्रगढ़ से लेकर अनूपपुर और उमरिया तक के लोग भी लाखों का दांव लगाने सिंहपुर पहुंच रहे हैं। सवाल उठता है कि इतने बाहरी वाहनों की आवाजाही पर सिंहपुर पुलिस की नजर आखिर कैसे नहीं पड़ रही?

इधर गोलू और आदेश यह अफवाह उड़ा रहे हैं कि कांग्रेस और बीजेपी के बड़े नेताओं तक “हिस्सा” भेजा जा रहा है। इन अफवाहों ने जहां जनता के भरोसे को चोट पहुंचाई है, वहीं गोलू–आदेश की तिजोरियां बेहिसाब भरती जा रही हैं।

शहडोल/सिंहपुर।
सिंहपुर का घना जंगल इन दिनों जुआड़ियों का नया अड्डा बन चुका है। सुबह 10 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक यहां खुलेआम जुआ के फड़ जमते हैं और दूर-दराज इलाकों से सैकड़ों जुआरी यहाँ जुटते हैं। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि अवैध जुआ संचालन में गोलू और आदेश की जोड़ी को स्थानीय पुलिस व कुछ प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है। यही वजह है कि जंगल के भीतर चल रहे धंधे को कोई रोकने वाला नहीं और थाना स्तर पर केवल खानापूर्ति की कार्यवाही कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।

गोलू–आदेश की तिकड़ी के आगे सब खामोश

सूत्र बताते हैं कि गोलू, आदेश और उनके कुछ आपराधिक सहयोगियों की तिकड़ी इतनी प्रभावी और दबंग है कि आस-पास के लोग विरोध तो दूर, इनके खिलाफ बोलने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस और कुछ नेताओं की “ढाल” के चलते इन लोगों पर किसी प्रकार की कार्यवाही होना तो दूर, कोई इनके करीब जाने का जोखिम भी नहीं उठाता। सिंहपुर की आम जनता अपनी सुरक्षा और आपसी शांति के चलते इनसे दूरी बनाकर ही चलने में भलाई समझती है।

मेहनतकश लोगों की कमाई पर गिद्धदृष्टि

शहडोल क्षेत्र का यह अंतिम छोर मेहनतकश और श्रमिक वर्ग की आबादी वाला इलाका है। दिन-भर मजदूरी कर लौटने वाले इन श्रमिकों की जेब में जो थोड़ा बहुत पैसा बचता है, उसी पर गोलू और आदेश की गिद्धदृष्टि रहती है। सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं का संरक्षण होने के कारण पुलिस भी इन पर हाथ डालने से बचती दिखाई देती है। यही कारण है कि संजय, गोलू और उनका नेटवर्क मजदूरों की खून-पसीने की कमाई को लूटने में दिन-ब-दिन और साहसी होता जा रहा है।

“पुलिस से सेटिंग है” – जुआड़ियों को दिया जाता है खुला भरोसा

सूत्रों के अनुसार आदेश जुआड़ियों को खुलकर आश्वासन देता है कि—
“पुलिस पूरे क्षेत्र में गश्त करेगी, लेकिन सिंहपुर जंगल में नहीं आएगी। सब ऊपर तक सेटिंग कर दी गई है। बिना डर-फिक्र के यहां खेलो।”
ऐसा भरोसा मिलने के बाद जुआरी बड़ी संख्या में यहां जुटते हैं, और स्थानीय लोग मजबूरी में खामोश रह जाते हैं। यह हालात यह साबित करने के लिए काफी हैं कि तंत्र की किसी न किसी स्तर पर सांठगांठ है।

शराब की खाली बोतलें और ताश की गड्डियां दे रही हैं सिंहपुर के जंगलो में गवाही

सिंहपुर के जंगलों में बिखरी शराब की खाली बोतलें, ताश की गड्डियां और फड़ी के अवशेष साफ संकेत देते हैं कि यहां सब “नॉर्मल” नहीं है। रहीमदास का दोहा यहाँ बिलकुल सटीक बैठता है—
“खैर, खून, खाँसी, खुशी, बैर, प्रीत, मधुपान – रहिमन दाबे से न दबे, जानत सकल जहान।”
जंगल में खुलेआम शराब और जुआ—दोनों—का माहौल बना हुआ है। शहडोल, बुढ़ार, धनपुरी, विक्रमपुर, अनूपपुर, चाचई, अमलाई, अमराडांडी, कोतमा व बिजुरी जैसे कई इलाकों से जुआ प्रेमी यहाँ रोज पहुँचते हैं।

पुलिस का रटा-रटाया जवाब — “गलत सूचना दोगे तो कार्यवाही तुम पर होगी”

सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि जब कोई नागरिक पुलिस को अवैध जुआ की सूचना देता है, तो पुलिस उल्टा उसी पर जवाब-तलब शुरू कर देती है—
“अगर टीम मौके पर गई और कुछ नहीं मिला तो गलत सूचना देने पर तुम पर ही कार्रवाई होगी।”
ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि—
जब रक्षक ही कार्रवाई से बचता रहे, तो शहर की हिफाजत कौन करेगा?
और बिल्ली के गले में घंटी बाँधे कौन?

स्थानीय जनता की पुलिस अधीक्षक से गुहार

सिंहपुर की आम जनता लगातार यह सवाल उठा रही है कि आखिर पुलिस इस अवैध साम्राज्य पर अंकुश लगाने से पीछे क्यों हट रही है? लोग पुलिस अधीक्षक से स्वतः संज्ञान लेकर गोलू, आदेश और उनके पूरे नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि आम जनता के मन में पुलिस व कानून के प्रति सम्मान बहाल हो सके और क्षेत्र में अमन-चैन लौट सके।

क्या कभी बंद होगा गोलू आदेश का जुआ?

सिंहपुर का जंगल अवैध जुआ और शराब तस्करी का गढ़ बनता जा रहा है। यदि पुलिस-प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह नेटवर्क आने वाले दिनों में और बड़ा व संगठित रूप ले सकता है। स्थानीय जनता की आवाज अब प्रशासन तक पहुँच चुकी है, अब देखना है कि खाकी कब जागती है।

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