
अमलाई खदान में बार-बार हड़ताल से करोड़ों का संकट, आरोपों के घेरे में प्रबंधन की कार्यशैली
अमलाई/सोहागपुर। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की अमलाई ओसीएम (ओपन कास्ट माइंस) इन दिनों लगातार विवाद और हड़ताल की आग में झुलस रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रोजाना कामकाज बाधित होने से कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन इस संकट से निपटने को लेकर अब तक कोई ठोस रणनीति सामने नहीं आ पाई है।
खदान संचालन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। श्रमिकों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिस्टम को दरकिनार कर व्यक्तिगत प्रभाव और दबाव की राजनीति से काम कराया जा रहा है, जिसका खामियाजा मजदूरों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
बार-बार हड़ताल से डगमगाया उत्पादन
अमलाई ओसीएम में लगातार हो रही हड़तालों ने उत्पादन व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है। खदान से जुड़े सूत्रों का कहना है कि क्षेत्रीय प्रबंधन अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि विवादों के पीछे जिम्मेदारी किसकी है और समाधान क्या होगा। जब खदान संचालन से जुड़े निर्णय स्पष्ट दिशा के बिना लिए जाते हैं तो उसका असर सीधे उत्पादन और सुरक्षा दोनों पर पड़ता है।
दुर्घटना की परछाईं और उठते सवाल
स्थानीय मजदूरों का आरोप है कि पूर्व में हुई एक दुर्घटना में एक युवक की मौत के बाद भी मामले को गंभीरता से लेने के बजाय दबाने की कोशिश की गई। श्रमिकों का कहना है कि दुर्घटना के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय ठेका कंपनी RKTC Infratech Limited पर दबाव बनाया गया। हालांकि इस पूरे मामले पर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन श्रमिकों के बीच यह मुद्दा आज भी असंतोष की बड़ी वजह बना हुआ है।
ठेका मजदूरों पर मानसिक दबाव के आरोप
स्थानीय ठेका मजदूरों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि खदान में काम करने वाले मजदूरों पर लगातार दबाव का माहौल बना रहता है। मजदूरों का आरोप है कि उन्हें बार-बार चेतावनी दी जाती है कि यदि सहयोग नहीं किया तो नौकरी से हटाया जा सकता है।
मजदूरों का कहना है कि इस तरह की भाषा किसी जिम्मेदार अधिकारी की नहीं बल्कि भय का वातावरण बनाने वाली मानसिकता को दर्शाती है। उनका दावा है कि इस दबाव के कारण कई मजदूर मानसिक तनाव में काम करने को मजबूर हैं।
स्थानीय युवाओं के रोजगार पर संकट
खनन क्षेत्रों में ठेका प्रणाली लागू करने का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार देना होता है। लेकिन अमलाई क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार से हटाने और नोटिस जारी करने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ओर स्थानीय नेताओं से व्यक्तिगत संपर्क बनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगार युवाओं के रोजगार अवसर प्रभावित हो रहे हैं। इससे क्षेत्र में असंतोष और अविश्वास का माहौल गहराता जा रहा है।
सबसे ज्यादा टूट रहे मजदूर परिवार
खदान में चल रहे विवाद का सबसे बड़ा असर मजदूरों के परिवारों पर पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि हड़ताल या काम बंद होने की स्थिति में सबसे पहले उनकी मजदूरी प्रभावित होती है। मजदूरी रुकने का मतलब बच्चों की पढ़ाई रुकना, घर का खर्च ठप होना और इलाज तक संकट में आ जाना होता है।
स्थानीय महिलाओं ने बताया कि उनके परिवार का पूरा भविष्य खदान पर निर्भर है। जब विवाद बढ़ता है तो परिवारों में आर्थिक ही नहीं बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ जाता है। कई परिवार कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं।
प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर उठता भरोसे का संकट
श्रमिकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान संचालन में पारदर्शिता की कमी दिखाई दे रही है। उनका आरोप है कि निर्णय प्रक्रिया में स्पष्टता नहीं है और इससे कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खदान संचालन केवल उत्पादन लक्ष्य पूरा करने का विषय नहीं होता, बल्कि यह श्रमिक सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा होता है। यदि प्रशासनिक दबाव और अव्यवस्था हावी होती है तो उसका असर लंबे समय तक उत्पादन और कंपनी की छवि दोनों पर पड़ सकता है।
अब जवाबदेही तय करने की मांग
अमलाई खदान में बढ़ते विवादों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एसईसीएल प्रबंधन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगा? क्या ठेका मजदूरों और स्थानीय युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा?
यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे तो यह विवाद केवल उत्पादन संकट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक असंतोष का बड़ा कारण बन सकता है।
इनका कहना हैं……
1,कोल इण्डिया चेयरमैन कार्यलय द्वारा कोई उत्तर नही मिला
2,,एसईसीएल के सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) हरीश दुहन का पक्ष जानने के लिए फोन लगाया गया पर उन्होंने फोन नही उठाया
3, बिलासपुर मुख्यालय मे पदस्थ अधिकृत जनसम्पर्क अधिकारी से भी एस सम्बन्ध मे उनका पक्ष जानने के लिए फोन लगाया गया उन्होंने मैसेज किया मै आपको कॉल बाद मे करता हूँ.
4, सोहागपुर एरिया महाप्रबंधक से भी उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए फोन लगाया गया लेकिन दूसरी तरफ से पूरी रिंग जाने के बाद भी फोन नही उठाया गए
इससे साफ़ संकेत मिलता हैं की सोहागपुर एरिया मे चल रही भारी शाही पर लगाम लगाना अब अधिकारियों को लगाना मुश्किल पड़ रहा है। खबर लिखे जाने तक कोई किसी भी अधिकारी का कोई पक्ष नहीं पता चल सका।
क्रमशः अगले अंक मे